Kids & Teensटूर्नामेंट वाले दिन का फैमिली प्लान: मैदान, गर्मी और बैटरी
Marta Osei 8 मिनट का रीडटूर्नामेंट वाला दिन तीन चीज़ों पर टिकता है: रात की तैयारी, मैदान पर मिलने की एक तय जगह, और बैटरी का इंतज़ाम। किट, पानी और स्नैक्स एक रात पहले पैक कीजिए, अकादमी या स्कूल के व्हाट्सऐप ग्रुप से शेड्यूल पक्का कीजिए, गेट के पास एक मिलने की जगह तय कीजिए, और परिवार के साझा मैप पर लोकेशन शेयर करके फोन को पावर सेविंग में रखिए ताकि शाम तक बैटरी बची रहे।
पहली बार जब हम बेटे के क्रिकेट टूर्नामेंट में गए थे, हम सुबह साढ़े छह बजे निकले और मुझे लगा कि हम बहुत अच्छी तैयारी के साथ जा रहे हैं। दोपहर एक बजे तक हम तीन बार पानी खरीद चुके थे, मेरा फोन ग्यारह प्रतिशत पर था, और हमें यह भी नहीं पता था कि अगला मैच किस ग्राउंड पर है।
अगले टूर्नामेंट तक हमने सीख लिया था कि यह दिन खेल का कम और इंतज़ाम का ज़्यादा है। बच्चा खेलता है दो या तीन घंटे। परिवार वहाँ रहता है आठ घंटे। जो चीज़ थकाती है वह मैच नहीं, बीच का समय होता है।
यह गाइड उसी बीच के समय के बारे में है। क्रिकेट अकादमी हो, फुटबॉल कोचिंग हो, स्कूल का स्पोर्ट्स डे हो या सोसाइटी के ग्राउंड पर होने वाला टूर्नामेंट, ढाँचा वही रहता है।
एक रात पहले
टूर्नामेंट वाले दिन की सबसे बड़ी मदद पिछली रात होती है। सुबह पाँच बजे कोई भी अच्छा फैसला नहीं ले पाता, इसलिए फैसले रात को ही ले लीजिए और सुबह सिर्फ उठाकर निकल जाइए।
रात को दरवाज़े के पास रखने वाली चीज़ें
- पूरी किट, जूते, मोज़े और गार्ड, एक ही बैग में, बच्चे ने खुद चेक किए हुए
- दो बड़ी पानी की बोतलें, एक ठंडे पानी वाली और एक सादी
- केला, खजूर, भुने चने या ऐसा कुछ जो गर्मी में खराब न हो
- पावर बैंक, चार्जिंग केबल और एक अतिरिक्त केबल गाड़ी के लिए
- टोपी, सनस्क्रीन, ओआरएस के पैकेट और एक छोटी फर्स्ट एड किट
- फोल्डिंग कुर्सी या दरी, क्योंकि हर ग्राउंड पर बैठने की जगह नहीं होती
शेड्यूल पक्का कीजिए। अकादमी या स्कूल का व्हाट्सऐप ग्रुप ही असली सूचना का ज़रिया होता है, पर उसमें सौ मैसेज भी होते हैं। सही समय और ग्राउंड का नाम ढूँढकर उसका स्क्रीनशॉट ले लीजिए और अपने कैलेंडर में चढ़ा दीजिए।
और घर पर तय कीजिए कि कौन जा रहा है। कई परिवारों में दादा दादी भी मैच देखने आना चाहते हैं, और यह बच्चे के लिए बहुत बड़ी बात होती है। बस यह सोच लीजिए कि वे कितनी देर धूप में बैठ पाएँगे और उनके लौटने का इंतज़ाम क्या रहेगा।
पहुँचना, पार्किंग और पहले पाँच मिनट
जितना सोचते हैं उससे बीस मिनट पहले निकलिए। टूर्नामेंट वाले ग्राउंड के बाहर पार्किंग वैसी नहीं होती जैसी नक्शे में दिखती है, और आखिरी पाँच सौ मीटर सबसे ज़्यादा समय लेते हैं।
पहुँचते ही सबसे पहले बच्चे को टीम तक पहुँचाइए, उसके बाद बाकी सब। कोच के सामने देर से पहुँचने का तनाव बच्चे के पूरे दिन पर असर डालता है।
- 1गाड़ी खड़ी करते ही उसकी जगह की एक फोटो ले लीजिए या मैप पर पिन कर दीजिए
- 2गेट के पास एक तय मिलने की जगह चुनिए और घर के सब लोगों को दिखा दीजिए
- 3टॉयलेट, पानी और मेडिकल पॉइंट कहाँ हैं, यह एक चक्कर में देख लीजिए
- 4बच्चे को बता दीजिए कि आप कहाँ बैठे होंगे और वह आपको कहाँ ढूँढ सकता है
मिलने की एक तय जगह, दिन भर के बीस फोन कॉल से बेहतर काम करती है।
अगर भीड़ बहुत ज़्यादा है और छोटे बच्चे भी साथ हैं, तो भीड़ में बिछड़ने का प्लान में वही तरीका थोड़ा और विस्तार से लिखा है।
एक मैदान से दूसरे मैदान तक
बड़े टूर्नामेंट अक्सर दो या तीन ग्राउंड पर एक साथ चलते हैं, और आधे दिन बाद यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि कौन कहाँ है। यहीं पर परिवार बिखरता है।
इसका हल तकनीक से पहले बातचीत में है। हर मैच के बाद टीम कहाँ जमा होगी, यह कोच से पूछ लीजिए और उसे परिवार के ग्रुप में लिख दीजिए।
- हर मैच खत्म होने पर बच्चा सीधे टीम की जगह जाएगा, दोस्तों के साथ घूमने नहीं
- अगर बच्चा कहीं और जा रहा है तो एक बड़े को बताकर जाएगा
- स्नैक और पानी टीम की जगह पर ही रखा जाएगा, इधर उधर नहीं
- जो बड़ा दूसरी जगह जा रहा है, वह ग्रुप में एक लाइन लिखकर जाएगा
- दिन के आखिर में सब गेट वाली तय जगह पर मिलेंगे, चाहे कुछ भी हो
अगर टीम को दूसरे शहर या दूसरे इलाके में मैच खेलने जाना है और बच्चा बस से जा रहा है, तो पहुँचने की सूचना का इंतज़ाम पहले कर लीजिए। कोच हर बच्चे के लिए अलग मैसेज नहीं कर पाते, यह उनसे उम्मीद रखना भी ठीक नहीं।
इसी तरह की लंबी यात्रा के लिए परिवार की रोड ट्रिप टेक चेकलिस्ट में बैटरी और सामान का पूरा इंतज़ाम लिखा है।
लोकेशन शेयरिंग कहाँ सच में काम आती है
टूर्नामेंट के दिन साझा लोकेशन का मतलब निगरानी नहीं है। इसका मतलब यह है कि परिवार के चार लोग तीन अलग ग्राउंड पर हैं और किसी को किसी को ढूँढने के लिए भीड़ में चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
सबसे ज़्यादा फायदा तब होता है जब दादा जी शाम को घर लौट रहे हों, या जब बच्चा दोस्त के परिवार के साथ आगे के मैच के लिए जा रहा हो, या जब आपको पार्किंग तक जाकर बैग लाना हो और बाकी लोग मैदान पर रहें।
टूर्नामेंट के दिन ऐप कैसे सेट करें
- सुबह निकलने से पहले परिवार के सर्कल में सबकी लोकेशन शेयरिंग चालू कर लीजिए
- ग्राउंड पर पहुँचने और घर लौटने का अलर्ट लगा दीजिए
- बच्चे को दिखा दीजिए कि वह भी आपकी लोकेशन देख सकता है, यह बात दोनों तरफ की है
- फोन को पावर सेविंग में डालिए और स्क्रीन की चमक कम रखिए
- दिन खत्म होने पर अलर्ट हटा दीजिए ताकि अगली बार सूचनाएँ बेकार में न आएँ
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बाकी माता पिता के साथ मिलकर
टूर्नामेंट का दिन अकेले संभालने की चीज़ नहीं है। टीम के बाकी माता पिता वही आठ घंटे उसी धूप में बिता रहे हैं, और थोड़ी सी बाँट लेने से सबका दिन आसान हो जाता है।
- 1पानी और स्नैक्स की बारी बाँट लीजिए, हर मैच के लिए एक परिवार
- 2छाया का इंतज़ाम मिलकर कीजिए, एक बड़ा छाता या दरी सबके काम आती है
- 3एक व्यक्ति शेड्यूल पर नज़र रखे और बदलाव ग्रुप में डाले
- 4लौटने की गाड़ियाँ पहले से तय कर लीजिए, ताकि शाम को अफरातफरी न हो
- 5फोटो और वीडियो एक ही जगह डालिए, ताकि हर कोई मैच देखे, स्क्रीन नहीं
और एक छोटी बात जो बड़ी है। साइडलाइन से कोचिंग मत कीजिए। बच्चे को एक ही आवाज़ सुननी चाहिए, और वह कोच की है। बाकी सब बस तालियाँ हैं।
बैटरी, खाना और दोपहर की सुस्ती
दोपहर दो बजे के आसपास हर टूर्नामेंट में एक ढलान आती है। गर्मी चढ़ चुकी होती है, दो मैच हो चुके होते हैं, और सबका मन उतर जाता है। यह वक्त पहले से पता है, इसलिए इसकी तैयारी भी हो सकती है।
भारी खाना यहाँ सबसे बड़ी गलती है। मैचों के बीच बच्चे को हल्का और थोड़ा थोड़ा चाहिए, वरना अगला मैच भारी पेट के साथ खेलना पड़ता है।
- हर मैच के बाद पानी और ओआरएस, प्यास लगने का इंतज़ार मत कीजिए
- केला, खजूर, भुने चने या मूँगफली, तला हुआ कुछ नहीं
- छाया में दस मिनट बैठना, चाहे बच्चा कहे कि उसे ज़रूरत नहीं
- फोन पावर सेविंग में, पावर बैंक बैग में, चार्जिंग गाड़ी में लौटते समय
- अगर सिर दर्द, चक्कर या पसीना बंद होने जैसा कुछ दिखे तो तुरंत मेडिकल पॉइंट
बैटरी की चिंता असली है, क्योंकि पूरे दिन लोकेशन शेयरिंग, फोटो और कैमरा साथ चलते हैं। यह कितनी खर्च होती है और कैसे कम की जाए, इस पर लोकेशन शेयरिंग से बैटरी क्यों खत्म होती है में सीधी सादी बात लिखी है।
घर की वापसी
जीत हो या हार, गाड़ी में बैठते ही सबसे पहले चुप्पी चाहिए। बच्चा थका है, भूखा है, और शायद कुछ महसूस कर रहा है जिसे वह खुद नहीं समझा सकता। मैच का विश्लेषण अभी नहीं।
हमारे घर में एक ही सवाल पूछा जाता है, आज सबसे मज़ेदार क्या रहा। अगर बच्चा और बात करना चाहे तो करता है, नहीं तो सो जाता है। दोनों ठीक हैं।
घर पहुँचकर किट बाहर निकालिए, बोतलें धो दीजिए और फोन चार्ज पर लगा दीजिए। अगला टूर्नामेंट किसी दिन आएगा, और तब यही दस मिनट आपको बचा लेंगे।
बच्चे को याद रहेगा कि आप वहाँ थे। यह याद नहीं रहेगा कि आप कितनी अच्छी पार्किंग ढूँढ पाए।
वो सवाल

Marta writes our Kids & Teens guides. Mother of two, professional over-preparer, firm believer that independence is a skill you practice, together first, then alone. She has road-tested every checklist in her own hallway at 7:40am.
Our guides are written by Be Closer's editorial voices and reviewed by the team behind the app. Questions? support@becloser.com





