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क्या location साझा करने से battery जल्दी ख़त्म होती है, सीधा जवाब

Portrait of Daniel Reyes, who writes the privacy and technology guides for Be CloserDaniel Reyes 9 मिनट का रीड

एक वाक्य का नियम, battery location साझा करने से नहीं, location बार बार नए सिरे से पता करने से खर्च होती है। जियोफेंस लगातार ट्रैकिंग से कहीं सस्ता पड़ता है, और अचानक तेज़ खपत आमतौर पर किसी सेटिंग या कमज़ोर network का संकेत होती है ।

घर में जब भी location साझा करने की बात चलती है, पहला सवाल यही आता है कि battery तो नहीं उड़ जाएगी। यह सवाल जायज़ है। दिन भर बाहर रहने वाले लोगों के लिए शाम तक बची हुई battery किसी भी सुविधा से ज़्यादा कीमती होती है ।

जवाब हाँ में है, पर उतना नहीं जितना लोग मानते हैं, और वजह भी वह नहीं है जो लोग समझते हैं। खर्च साझा करने में नहीं होता, खर्च इसमें होता है कि phone कितनी बार अपनी जगह नए सिरे से पता करता है, और उस समय कौन कौन से रेडियो जागते हैं ।

यह लेख उसी इंजीनियरिंग को आसान शब्दों में रखता है, और साथ में यह भी बताता है कि किन हालात में तेज़ खपत सामान्य है और किनमें यह किसी गड़बड़ी का संकेत है ।

battery असल में खर्च कहाँ होती है

phone की जगह पता करने के तीन मुख्य तरीके हैं। सैटेलाइट से मिलने वाला GPS सबसे सटीक है और सबसे महँगा भी। Wi-Fi के आसपास मौजूद नामों से अंदाज़ा लगाना बीच का रास्ता है। मोबाइल टावरों से अंदाज़ा सबसे सस्ता है और सबसे मोटा। phone इन तीनों को हालात के हिसाब से मिलाकर इस्तेमाल करता है ।

इसलिए खर्च का असली पैमाना यह है कि सैटेलाइट वाला हिस्सा कितनी देर जागा रहा। एक बार जगह पता करने में बहुत कम बिजली लगती है, पर हर कुछ सेकंड में यह दोहराया जाए तो असर दिखने लगता है। यही फर्क है सामान्य साझा करने और लगातार लाइव ट्रैकिंग में ।

याद रखने लायक ढाँचा

  • GPS सबसे सटीक, सबसे महँगा ।
  • Wi-Fi और टावर से अंदाज़ा, कम सटीक, बहुत सस्ता ।
  • खर्च का पैमाना समय है, कितनी देर सटीक तरीका चालू रहा ।
  • कमज़ोर network में खपत बढ़ती है, क्योंकि phone बार बार जुड़ने की कोशिश करता है ।

जियोफेंस सस्ता क्यों पड़ता है

जियोफेंस का मतलब है किसी जगह के आसपास एक घेरा, जैसे घर, स्कूल या दादी का घर। phone को हर पल यह बताने की ज़रूरत नहीं होती कि वह कहाँ है, उसे बस उस समय बताना है जब घेरा पार हो। यह काम phone के भीतर मौजूद कम बिजली वाले हिस्से करते हैं, जो पूरे सिस्टम को जगाए बिना चलते रहते हैं ।

यही वजह है कि पहुँचने का अलर्ट लगाना, दिन भर नक्शा खुला रखने से कहीं सस्ता है। ज़्यादातर घरों को असल में यही चाहिए। बच्चा स्कूल बस से उतरकर घर पहुँच गया, पिता मंदिर से लौट आए, बस इतना ।

  • दो या तीन जियोफेंस काफ़ी हैं, दस बनाने से कोई फ़ायदा नहीं ।
  • बहुत छोटा घेरा बार बार गलत अलर्ट देता है और खपत बढ़ाता है ।
  • नक्शा खुला रखना सबसे महँगा तरीका है, ज़रूरत हो तभी खोलिए ।

कौन सी सेटिंग असल में मदद करती हैं

  1. 1location की permission हमेशा वाली रखिए। यह उल्टा लगता है, पर बार बार अनुमति माँगने और नए सिरे से जुड़ने में ज़्यादा बिजली जाती है ।
  2. 2अलर्ट सिर्फ ज़रूरी जगहों के लिए रखिए, हर जगह के लिए नहीं ।
  3. 3नक्शा देखकर बंद कर दीजिए, पीछे खुला मत छोड़िए ।
  4. 4स्क्रीन की चमक कम रखिए। कई बार जिसे location का खर्च समझा जाता है, वह असल में स्क्रीन का होता है ।
  5. 5कमज़ोर network वाली जगहों पर data बचाने वाली सेटिंग समझदारी से चुनिए, पूरी तरह बंद करना अपडेट रोक देता है ।

सटीकता और battery के बीच सौदा हमेशा रहेगा। जो ऐप यह कहे कि उसमें कोई खर्च ही नहीं है, वह पूरी बात नहीं बता रहा ।

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भारतीय हालात में कुछ अलग बातें

यहाँ रोज़ की कुछ बातें इस हिसाब को बदल देती हैं। कई इलाकों में बिजली जाती है, इसलिए charging का समय तय नहीं रहता। लंबी बस या मेट्रो यात्रा में network बदलता रहता है और phone बार बार जुड़ने की कोशिश करता है। data पैक ख़त्म होने पर भी phone कोशिश करता रहता है, जिससे खपत बढ़ती है ।

  • बैग में एक चार्ज किया हुआ पावर बैंक रखिए, ख़ास तौर पर बच्चों की लंबी यात्रा वाले दिनों में ।
  • दो सिम वाले phone में जिस सिम पर data है, उसी की सेटिंग देखिए ।
  • बुज़ुर्गों के phone में रात को चार्ज करने की जगह तय कर दीजिए, याद रखना आसान हो जाता है ।
  • गर्मियों में phone गरम होने पर खपत बढ़ती है, इसे ऐप की गलती मत मानिए ।

कब यह किसी गड़बड़ी का संकेत है

थोड़ी बहुत खपत सामान्य है। पर अगर एक ही तरह के दिन में अचानक battery पहले से बहुत तेज़ ख़त्म होने लगे, तो कुछ बदला है। पहले यह देखिए कि क्या बदला, फिर ऐप को दोष दीजिए ।

  • क्या कोई नया ऐप जुड़ा है जो पीछे चल रहा है ।
  • क्या हाल में कोई सिस्टम अपडेट हुआ है ।
  • क्या phone ज़्यादातर समय कमज़ोर network वाली जगह पर रहा ।
  • क्या battery पुरानी हो चुकी है, दो तीन साल बाद यह अपने आप कम टिकती है ।
जिस हफ्ते मेरे भाई का phone दोपहर तक ख़त्म होने लगा, वजह location नहीं थी। वजह यह थी कि नए दफ्तर के तहखाने में network मुश्किल से आता था और phone दिन भर जुड़ने की कोशिश करता रहता था ।

इसी विषय पर और गहराई से पढ़ना हो तो location साझा करने से battery क्यों ख़त्म होती है देखिए, और जानकारी कितने दिन रखी जाए यह समझने के लिए location history कितने दिन रखें पढ़िए ।

Be Closer मुफ्त डाउनलोड है, 13 भाषाओं में उपलब्ध है, App Store और Google Play पर 150,000 से अधिक रेटिंग के साथ 4.4 सितारे रखता है और location में 95 प्रतिशत तक सटीकता देता है। इसके बावजूद नियम वही रहता है, जितना कम बार सटीक तरीका जगाया जाए, उतनी battery बचेगी ।

वो सवाल

Portrait of Daniel Reyes, who writes the privacy and technology guides for Be Closer
Daniel Reyes
Privacy, Trust & How It Works

Daniel covers privacy, consent and the technology under the hood. A dad who reads the settings screens so you don't have to, he believes the best family tech is the kind you can explain to your kid in one sentence, and that nothing should ever be tracked in secret.

Our guides are written by Be Closer's editorial voices and reviewed by the team behind the app. Questions? support@becloser.com

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