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सभी गाइड्सशाम की रोशनी में घर के आंगन में सफेद मुंह वाला बुजुर्ग कुत्ता धीरे धीरे टहलता हुआPets

जब बूढ़ा कुत्ता भटकने लगे, धुंधले सालों में साथ निभाना

Portrait of Priya Nair, who writes about aging parents, pets and family life for Be CloserPriya Nair 8 मिनट का रीड

बुजुर्ग कुत्तों का भटकना आमतौर पर उलझन, कम सुनाई देने, कम दिखाई देने या दर्द से आता है, भागने की चाह से नहीं। घर और गेट को नए सिरे से देखिए, सैर छोटी और जानी पहचानी रखिए, कॉलर पर पक्का नाम पता लगाइए, और अगर वह अकेले बाहर निकल जाता हो तो एक tracker रखिए। रात में चक्कर काटना या दिशा भूलना डॉक्टर को दिखाने की बात है।

मेरे पड़ोसी का कुत्ता मोती तेरह साल का है। वह गली का नहीं है, वह घर का है, और वह पूरे परिवार का सबसे पुराना सदस्य है। पिछले महीने वह शाम को दरवाजे से निकलकर उस तरफ चल दिया जिस तरफ वह कभी नहीं जाता था, और फिर दो गलियां आगे एक बंद दुकान के सामने खड़ा रह गया। किसी ने उसे भगाया नहीं था। वह किसी से नाराज भी नहीं था। वह बस भूल गया था कि वह कहां है।

यह अनुभव पालने वालों को अंदर तक हिला देता है, क्योंकि वही कुत्ता दस साल तक बिना पट्टे के आपके पीछे चलता रहा था। बुढ़ापे में उसका भटकना नियम तोड़ना नहीं है। वह अक्सर एक बदला हुआ दिमाग, कमजोर आंखें, कम सुनाई देना, या कहीं छुपा हुआ दर्द होता है।

यह लेख उसी मोड़ के लिए है। यह इस बारे में है कि बूढ़ा कुत्ता क्यों भटकता है, वह भागने से कैसे अलग है, घर और सैर को कैसे बदलना है, GPS कब सचमुच काम का होता है, और डॉक्टर के पास क्या लेकर जाना है। यह चिकित्सकीय सलाह नहीं है, आपके पशु चिकित्सक की बात हमेशा ऊपर है।

बुजुर्ग कुत्ते क्यों भटकते हैं

पहले तो यह मान लीजिए कि यह अवज्ञा नहीं है। जो कुत्ता दस साल आपकी आवाज पर लौटता रहा है वह अचानक जिद्दी नहीं हो जाता। कुछ और बदला है।

  • दिमागी बदलाव। उम्र के साथ कुत्तों में भी उलझन आती है। जानी पहचानी जगह अजनबी लगने लगती है, और वे उसमें रास्ता ढूंढते हुए चल पड़ते हैं।
  • आंखें और कान। कम दिखता है तो वे मुड़ने का सही मोड़ चूक जाते हैं। कम सुनाई देता है तो आपकी आवाज उन तक पहुंचती ही नहीं।
  • नाक बची रहती है। सूंघने की ताकत सबसे आखिर में जाती है, इसलिए वे किसी गंध के पीछे चल देते हैं जबकि बाकी इंद्रियां साथ नहीं दे रहीं।
  • दर्द और बेचैनी। जोड़ों का दर्द बैठने नहीं देता, तो कुत्ता उठता है, चलता है, फिर बैठता है, और यह चलना कमरे से निकलकर गेट तक पहुंच जाता है।
  • दिन रात का उलटा हो जाना। कई बुजुर्ग कुत्ते दिन में सोते हैं और रात में जागकर घूमते हैं, और रात में दरवाजा खुला मिलना सबसे आसान होता है।

इसका मतलब यह भी है कि सजा का यहां कोई काम नहीं। डांटने से एक उलझा हुआ कुत्ता सिर्फ डरता है, समझता कुछ नहीं। जो काम करता है वह है माहौल को आसान बनाना और रोज का ढर्रा बहुत ज्यादा न बदलना।

बूढ़ा कुत्ता आपसे भाग नहीं रहा। वह उस घर में रास्ता ढूंढ रहा है जो कभी उसे पूरा याद था।

भटकना और भागना अलग बातें हैं

यह फर्क सिर्फ शब्दों का नहीं है। दोनों का इलाज अलग है, और भटकते कुत्ते पर भागने वाला इलाज लगाने से कुछ हासिल नहीं होता।

भागनाभटकना
किसी चीज की तरफ, जैसे बिल्ली या दूसरा कुत्ताकिसी दिशा में नहीं, बस चलते जाना
तेज और सीधाधीमा और टेढ़ा मेढ़ा
बुलाने पर अक्सर लौट आता हैबुलाना सुनता ही नहीं या समझ नहीं पाता
दीवार या गेट लांघने की कोशिशखुला रास्ता मिल जाए तो निकल जाना
जवान और ऊर्जा से भराबूढ़ा, कई बार उसी जगह ठहर जाता है

भागने वाले कुत्ते के लिए ऊंची दीवार और ज्यादा भागदौड़ चाहिए। भटकने वाले के लिए बंद दरवाजा, आसान रास्ता और नजर चाहिए। क्यों भागते हैं, इस पर अलग से कुत्ता क्यों भागता है पढ़िए।

घर, आंगन और गेट को नए सिरे से देखना

जो इंतजाम पांच साल पहले पूरे थे वे अब पूरे नहीं हैं, क्योंकि खतरा अब कूदने का नहीं, चुपचाप खुले रास्ते से निकल जाने का है।

बुजुर्ग कुत्ते के लिए घर की जांच

  • मुख्य गेट और दरवाजा। जो गेट अपने आप बंद नहीं होता वही सबसे बड़ा खतरा है। एक साधारण कुंडी या spring वाला बंद होने का इंतजाम काफी है।
  • घर के लोग और मेहमान। ज्यादातर कुत्ते सामान उतारते समय या मेहमान के आते जाते समय निकलते हैं। घर में एक नियम बना दीजिए कि दरवाजा खुलने से पहले कुत्ता कहां है, यह देख लिया जाए।
  • सीढ़ियां और ढलान। कमजोर पैरों के लिए एक फिसलन रोकने वाली पट्टी या छोटी रेलिंग बहुत फर्क डालती है।
  • अंधेरे कोने। आंगन और गलियारे में हल्की रात की रोशनी लगाइए, कमजोर नजर वाले कुत्ते को इससे बहुत मदद मिलती है।
  • पानी और छांव। बूढ़े कुत्ते गर्मी जल्दी झेल नहीं पाते, और गर्मी में उलझन बढ़ जाती है।
  • फिसलने वाला फर्श। चमकदार टाइल पर पुराने कूल्हे नहीं टिकते। रोज के रास्ते पर एक पुरानी दरी बिछा दीजिए।

एक और छोटी बात। कॉलर पर नाम, घर का पता और दो phone नंबर साफ लिखा होना चाहिए, और microchip हो तो उसमें दर्ज नंबर अपडेट रखिए। ज्यादातर कुत्ते किसी बड़ी खोज से नहीं, किसी पड़ोसी के फोन से मिलते हैं।

सैर बदलिए, जिंदगी छोटी मत कीजिए

पहली प्रतिक्रिया यही होती है कि अब बाहर ले जाना ही बंद कर देते हैं। यह समझ में आता है और यह गलत है। सैर बूढ़े कुत्ते के दिन की सबसे बड़ी चीज है, और उसे छीन लेने से उलझन और बढ़ती है।

  1. 1छोटी और ज्यादा बार। एक लंबी सैर की जगह दिन में दो या तीन छोटी सैर आसान पड़ती हैं।
  2. 2वही रास्ता रखिए। जाना पहचाना रास्ता याद और नाक दोनों के सहारे चलता है। नए रास्ते रोमांचक नहीं, उलझाने वाले होते हैं।
  3. 3सूंघने का समय दीजिए। बूढ़े कुत्ते के लिए दस मिनट सूंघना उतना ही संतोष देता है जितना पहले आधे घंटे की दौड़ देती थी।
  4. 4पट्टा वापस लगाइए। जो कुत्ता सालों बिना पट्टे के चला हो, उसके लिए भी अब पट्टा सुरक्षा है, सजा नहीं। पार्क में लंबा पट्टा बीच का रास्ता है।
  5. 5गर्मी से बचिए। सुबह जल्दी और शाम ढले निकलिए। दोपहर की तपती सड़क पंजों के लिए भी खतरनाक है।
  6. 6घर वापसी का संकेत तय कीजिए। कम सुनने वाले कुत्ते के लिए हाथ का इशारा या हल्की टॉर्च आवाज से बेहतर काम करती है।

अंधेरे के बाद निकलना पड़े तो चमकने वाला कॉलर और एक टॉर्च रखिए, और बाकी बातें अंधेरे के बाद कुत्ते की सैर में हैं।

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GPS collar या tracker कब काम का होता है

हर बुजुर्ग कुत्ते को tracker नहीं चाहिए। जो कुत्ता कभी अकेला बाहर नहीं जाता, उसके लिए वह बस एक और चीज है जो गले में लटकी रहेगी।

पर कुछ हालात में वह सचमुच काम आता है, और उन्हें पहचान लेना बेहतर है।

  • कुत्ता पहले भी एक बार निकल चुका है। एक बार हो जाए तो दूसरी बार की तैयारी समझदारी है।
  • घर में लोग आते जाते रहते हैं, बच्चे, काम वाले, मेहमान, और दरवाजा दिन भर खुलता बंद होता है।
  • आप किसी नई जगह गए हैं, नया घर, गांव, या रिश्तेदार के यहां, जहां रास्ता उसे बिल्कुल याद नहीं।
  • वह रात में जागकर घूमता है और घर में कोई सो रहा होता है।

अच्छा tracker वही है जो हल्का हो, कॉलर पर मजबूती से बैठे, और जिसकी battery का हाल आपको पहले से पता हो, क्योंकि खाली battery वाला tracker कोई tracker नहीं होता। यह भी याद रखिए कि इस तरह की तकनीक की सटीकता हालात पर निर्भर करती है और अच्छी परिस्थितियों में 95% तक जाती है, इसलिए वह आपको इलाका बताता है, दरवाजा नहीं।

और अगर कभी वह पल आ ही जाए, तो पहले घंटे की योजना पहले से पढ़ी हुई होनी चाहिए, पालतू खो जाए तो पहले 24 घंटे उसी के लिए है।

डॉक्टर से बातचीत

भटकना एक लक्षण है, आदत नहीं। इसे बुढ़ापा कहकर छोड़ देना आसान है, पर कई वजहें ऐसी होती हैं जिनका कुछ किया जा सकता है, जैसे दर्द, थायरॉइड, नजर की समस्या, या रक्तचाप।

अपने पशु चिकित्सक को घटनाओं का हाल बताइए, अपनी राय नहीं। तारीख, समय, कितनी देर, और उससे पहले क्या हुआ था, यह सब उन्हें बहुत आगे तक ले जाता है।

यह सब लेकर जाइए

  • कब कब हुआ, तारीख और समय के साथ, खासकर यह कि दिन में या रात में।
  • नींद का बदलाव, दिन में ज्यादा सोना, रात में चक्कर काटना, कोने में जाकर खड़े रह जाना।
  • खाना और पानी, कितना कम या ज्यादा हुआ।
  • चलने का तरीका, अकड़न, सीढ़ी से बचना, बैठते उठते आवाज।
  • घर के अंदर की उलझन, गलत दरवाजे पर खड़े होना, बुलाने पर देर से पहचानना।
  • एक छोटा video अगर बन सके, क्योंकि जो आप बता नहीं पाते वह वे देख लेते हैं।

इस मुलाकात से यह नहीं निकलेगा कि कुत्ता फिर से जवान हो जाए। इससे यह निकल सकता है कि उसका दर्द कम हो, नींद ठीक हो, और आपके पास आने वाले महीनों की एक साफ तस्वीर आ जाए।

कहानी में उसकी इज्जत बनी रहे

इस दौर में हम कुत्ते के बारे में उसके सामने ही ऐसे बात करने लगते हैं जैसे वह पहले से कम हो गया हो। वह कम नहीं हुआ है। वह बूढ़ा हुआ है, और यह वही सौदा है जो हमने पहले दिन उसे घर लाते समय किया था।

इसलिए इंतजाम को इसी तरह देखिए। कुंडी, छोटा पट्टा, कॉलर पर लटका tracker, ये सब उसे कैद करने के लिए नहीं हैं। ये उसे शाम की सैर देते रहने के लिए हैं।

घर के बच्चों को भी शामिल कीजिए। उन्हें बताइए कि मोती अब कम सुनता है, इसलिए पीछे से चिल्लाना नहीं है, सामने आकर हाथ दिखाना है। बच्चे इस उम्र के बारे में उतना ही सीखते हैं जितना कुत्ते की देखभाल के बारे में।

आखिरी साल छोटे नहीं करने होते। उन्हें बस थोड़ा और सोचकर जीना होता है।

वो सवाल

Portrait of Priya Nair, who writes about aging parents, pets and family life for Be Closer
Priya Nair
Aging Parents, Pets & Family Life

Priya writes about the family members we care for at every age, parents living alone, dogs that bolt at squirrels, and the quiet worry in between. She writes the way she checks in: gently, and always dignity first.

Our guides are written by Be Closer's editorial voices and reviewed by the team behind the app. Questions? support@becloser.com

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